डॉ. रणधीर कुमार ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र , ऑनलाइन गेमिंग एवं सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर सख्त कानून की मांग तेज

नेशनल डेस्क/ नई दिल्ली

देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स—विशेषकर ऑनलाइन गेमिंग एवं सोशल मीडिया—के दुष्प्रभावों को लेकर नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने इस गंभीर विषय पर माननीय राष्ट्रपति महोदया को एक विस्तृत एवं महत्वपूर्ण पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप एवं कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

डॉ. रणधीर कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि “डिजिटल युग में तकनीक का सकारात्मक उपयोग जहां विकास का माध्यम है, वहीं इसका अनियंत्रित और दुरुपयोग समाज, विशेषकर बच्चों और किशोरों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। आज ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जिस प्रकार हिंसात्मक, अश्लील, भ्रामक एवं आयु-अनुपयुक्त सामग्री का प्रसार हो रहा है, वह एक उभरता हुआ राष्ट्रीय संकट है।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इंटरनेट और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच के कारण देश के छोटे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक बच्चे और किशोर बिना किसी प्रभावी निगरानी के इन प्लेटफॉर्म्स के संपर्क में आ रहे हैं, जिससे उनके मानसिक, सामाजिक एवं नैतिक विकास पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

बढ़ता खतरा: बच्चों पर गंभीर दुष्प्रभाव

पत्र मे विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि ऑनलाइन कंटेंट के अनियंत्रित प्रभाव के कारण बच्चों एवं किशोरों में निम्नलिखित समस्याएं तेजी से उभर रही हैं—

मानसिक तनाव, अवसाद एवं चिंता में लगातार वृद्धि

आक्रामक एवं असामाजिक व्यवहार का विकास

पढ़ाई से दूरी एवं एकाग्रता में गिरावट

डिजिटल लत (Addiction) की गंभीर समस्या

साइबर अपराधों में संलिप्तता

आत्मघाती प्रवृत्तियों में चिंताजनक वृद्धि

 

डॉ. रणधीर कुमार ने इसे “देश के भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी” बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसके सामाजिक और राष्ट्रीय परिणाम अत्यंत घातक हो सकते हैं।

वर्तमान व्यवस्था पर सवाल

अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान कानूनी एवं नीतिगत व्यवस्थाएं इस चुनौती का प्रभावी समाधान देने में असफल साबित हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि—

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉनिटरिंग कमजोर है

आयु सत्यापन (Age Verification) की व्यवस्था प्रभावी नहीं है

कंपनियों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय नहीं है

दंडात्मक प्रावधान पर्याप्त कठोर नहीं हैं

राष्ट्रपति से की गई प्रमुख मांगें

 

नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) ने अपने पत्र के माध्यम से निम्नलिखित ठोस एवं तत्काल कदम उठाने की मांग की है—

बच्चों के लिए हानिकारक ऑनलाइन गेमिंग एवं सोशल मीडिया कंटेंट पर कठोर नियामक नियंत्रण लागू किया जाए।

आयु-आधारित कंटेंट वर्गीकरण (Age Rating System) एवं अभिभावकीय नियंत्रण प्रणाली को अनिवार्य बनाया जाए।

अश्लील, हिंसक, जुआ-संबंधी एवं भ्रामक सामग्री के प्रसारण पर रोक हेतु सख्त दंडात्मक कानून बनाए जाएं।

बच्चों की सुरक्षा हेतु एक व्यापक कानून “बाल डिजिटल सुरक्षा अधिनियम” लागू किया जाए।

सभी सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए भारत में अनिवार्य लाइसेंसिंग एवं जवाबदेही प्रणाली सुनिश्चित की जाए।

विद्यालयों, अभिभावकों एवं छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल जागरूकता अभियान चलाया जाए।

साइबर विशेषज्ञों, बाल अधिकार संगठनों एवं शिक्षा विशेषज्ञों की संयुक्त उच्चस्तरीय समिति गठित कर ठोस नीति एवं कार्ययोजना तैयार की जाए।

सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील

 

डॉ. रणधीर कुमार ने अपने पत्र के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया है कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को आवश्यक निर्देश प्रदान किए जाएं, ताकि शीघ्र प्रभावी कानून एवं नीतियां लागू की जा सकें।

उन्होंने कहा कि “बच्चों का सुरक्षित, स्वस्थ एवं संतुलित विकास ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है, और इसे सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

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