
हजारीबाग में पत्रकार पर हुए हमले की घोर निंदा एवं त्वरित न्यायिक कार्रवाई की मांग, डॉ.रणधीर ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र।
राज्य ब्यूरो रिपोर्ट/ झारखंड:
नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ रणधीर कुमार ने झारखण्ड के हजारीबाग स्थित सदर अस्पताल परिसर में स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के दौरान एक पत्रकार पर हुए कथित हमले की घटना को अत्यंत गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया है ।
डॉ रणधीर ने मुख्यमंत्री को लिखित पत्र में जानकारी दिया है कि , प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनहित से जुड़े प्रश्न पूछने पर उक्त पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार एवं शारीरिक हिंसा की गई, जो कि स्पष्ट रूप से कानून के शासन (Rule of Law) के विरुद्ध तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
यह घटना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह प्रेस की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक पारदर्शिता और जनउत्तरदायित्व की भावना पर आघात है। एक स्वस्थ लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
NHRCCB इस घटना को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए स्पष्ट करता है कि यह कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) एवं अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का भी उल्लंघन है, जिनमें Universal Declaration of Human Rights तथा International Covenant on Civil and Political Rights प्रमुख हैं, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा की गारंटी प्रदान करते हैं।
डॉ रणधीर की प्रमुख मांगें:
1. उक्त घटना की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच तुरंत सुनिश्चित की जाए।
2. घटना में शामिल सभी व्यक्तियों की शीघ्र पहचान कर उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
3. पीड़ित पत्रकार को तत्काल सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा एवं विधिक सहायता प्रदान की जाए।
4. राज्य में कार्यरत सभी पत्रकारों की सुरक्षा हेतु एक प्रभावी “पत्रकार सुरक्षा नीति” लागू की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
5. प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने कहा कि “लोकतंत्र की मजबूती स्वतंत्र पत्रकारिता पर निर्भर करती है। पत्रकारों पर हिंसा लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करती है, जिसे किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
NHRCCB यह अपेक्षा करता है कि झारखण्ड सरकार इस गंभीर मामले में त्वरित, पारदर्शी एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी, जिससे जनता में न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास और मजबूत हो सके।
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