
NHRCCB) ने घाघीडीह सेंट्रल जेल, जमशेदपुर की आंतरिक वित्तीय व्यवस्थाओं में पारदर्शिता को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आवेदन किया दाखिल
राज्य ब्यूरो/ झारखंड , जमशेदपुर, 14 जुलाई 2026
नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (NHRCCB) ने घाघीडीह सेंट्रल जेल, जमशेदपुर की आंतरिक वित्तीय व्यवस्थाओं में पारदर्शिता को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आवेदन दाखिल किया है।
ब्यूरो को बंदियों के परिजनों की ओर से समय-समय पर यह शिकायतें प्राप्त होती रही हैं कि जेल में बंद परिजन तक धनराशि पहुँचाने, कैंटीन से सामग्री दिलाने तथा मुलाकात जैसी बुनियादी सुविधाओं में उन्हें अनुचित कठिनाइयों और कथित अवैध मांगों का सामना करना पड़ता है। बंदी और उसका परिवार व्यवस्था के समक्ष सबसे कमजोर स्थिति में होते हैं — यही कारण है कि ऐसी शिकायतें प्रायः दर्ज ही नहीं हो पातीं। सर्वोच्च न्यायालय बार-बार दोहरा चुका है कि कारावास से बंदी के मौलिक अधिकार समाप्त नहीं होते।
इन्हीं शिकायतों की पुष्टि या निराकरण अभिलेखों के आधार पर करने हेतु दाखिल RTI में निम्न बिंदुओं पर सूचना मांगी गई है — बंदियों के खातों में धन जमा करने के अधिकृत माध्यम एवं मासिक सीमा संबंधी नियम/परिपत्र; क्या धन जमा करने पर कोई शुल्क, सेवा प्रभार अथवा कमीशन देय है और यदि हाँ तो किस आदेश से; जमाकर्ता को रसीद तथा बंदी को सूचना देने की प्रक्रिया; बंदी नकद खातों (PD Account) के अंकेक्षण प्रतिवेदन; जेल कैंटीन की अनुमोदित मूल्य-सूची, विक्रेता चयन के अभिलेख एवं कैंटीन लेखा अंकेक्षण; जनवरी 2023 से अब तक जेल कर्मियों के विरुद्ध धन की मांग/अवैध वसूली संबंधी प्राप्त शिकायतों की संख्या एवं कृत कार्रवाई; विभागीय/निगरानी जाँचों की स्थिति; जिला एवं सत्र न्यायाधीश, उपायुक्त, बोर्ड ऑफ विजिटर्स आदि के निरीक्षण प्रतिवेदन; बंदियों व परिजनों हेतु उपलब्ध शिकायत निवारण तंत्र; तथा धन जमा काउंटर, कैंटीन एवं मुलाकात क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों की संख्या व कार्यशील स्थिति।
ब्यूरो के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव विनय कुमार चन्द्रा ने कहा — “हम किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगा रहे। हम केवल यह चाहते हैं कि जेल प्रशासन अभिलेखों में स्पष्ट करे कि धन जमा करने की अधिकृत व्यवस्था क्या है और उस पर कोई शुल्क देय है या नहीं। एक बार आधिकारिक स्थिति अभिलेख पर आ जाए, तो नियम और व्यवहार का हर अंतर स्वयं प्रमाण बन जाएगा। यदि व्यवस्था पारदर्शी है, तो जेल प्रशासन को इन सूचनाओं को सार्वजनिक करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए।”
ब्यूरो ने राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि बंदियों के खातों में धन जमा करने की पूर्णतः डिजिटल, रसीद-आधारित व्यवस्था लागू हो, कैंटीन की मूल्य-सूची जेल परिसर में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए, तथा परिजनों हेतु एक स्वतंत्र शिकायत हेल्पलाइन उपलब्ध कराई जाए।
RTI के उत्तर के आधार पर ब्यूरो कारा महानिरीक्षक, झारखण्ड एवं सक्षम प्राधिकारों के समक्ष आगे की कार्रवाई करेगा। जिन परिजनों को इस संबंध में कोई ठोस अनुभव हो, वे तिथि, राशि एवं विवरण सहित ब्यूरो से संपर्क कर सकते हैं।
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