रांची में नागपुरी भाषा परिषद की और से प्रेस क्लब में बैठक का आयोजन


झारखंड संवादाता /दशरथ विश्वकर्मा

आज दिनांक 8 फरवरी 2022 प्रेस क्लब, करम टोली, नागपुरी परिषद् परिषद से हर साल की गांधी जी के महान साहित्यकार जुबली कुमार जुबली सह प्रफुल्ल सम्मान मीटिंग में श्री रामचित सिंह। शकुंतला मिश्र धातु को अभिमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के रोग विश्वविद्यालय के पूर्वाह्न प्रो. (डाॅ.) राकेश कुमार पाण्डेय, डॉ. विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रो. (डाॅ) कामिनी कुमार, गृहस्वामी। मुकुंद चंद्र मेहता, वित्त डॉ. कुमार अदितेंद्र नाथ शाह कार्यक्रम का संचार नागपुर भाषादेव ने विज्ञापन पोस्ट किया। गीत डाॅ.अशोक कुमार जी ने स्वागत गीत किया।

जुबली के परावर्तन विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. कॉमिक भाषा की गति की चाल है। मातृभाषा के विकास की ओर से… को सुधारा गया है। संप्रेषण के मन में भाषा की प्रति समीक्षा। 

   रोहिणी विश्वविद्यालय के डॉ. पुनरुद्भवन कुमारी पुनरुत्पादक रय… प्रफुल्ल कुमार रईस हस्ती का नाम प्रबल है तन मन धन न्योछावर कर भाषा के विकास के लिए। आज में 9 की परीक्षा की परीक्षाएं हैं। एक साथ सभी 9 के विकास की चिंता। संस्कृति की भाषाएं परिचायक हैं। प्रफुल्ल जुबली और जागते रहने के लिए जागते हैं। रेवाड़ी के विश्वविद्यालय डॉ. कुमार अदितेंद्र नाथ शाह ने कि इस प्रकार के दैत्य से देवगंगा भाषा के बीच और बेहतरी। मैडी और सहियारो की स्थिरता को पूरा किया है। भाषा के प्रति व्यक्ति की अभिव्यक्ति। पुरातनता काल भी। श्री मुकुंद नायक ने कहा पद्मा गुणीगुणागुणी अखड़ागा। पद्मश्री डाॅ.रामदयाल मुंडा की तकनीक का सक्षम, दादाजी ने कहा कि *जे नाची से बची * हम नाचते हैं अखरा में, अगर हम अखड़ा को बचाते हैं तो पर्यावरण को नष्ट होने से बचाते हैं। महालेख अखड़ा को। हमारा संगीत अजीबोगरीब है। रोग होने से बचा रहता है। महालेख अखड़ा को। हमारा संगीत अजीबोगरीब है। रोग होने से बचा रहता है। महालेख अखड़ा को। हमारा संगीत अजीबोगरीब है। रोग होने से बचा रहता है। महालेख अखड़ा को। हमारा संगीत अजीबोगरीब है। रोग होने से बचा रहता है। महालेख अखड़ा को। हमारा संगीत अजीबोगरीब है।रामदयाल मुंडा की तकनीक का सक्षम, दादाजी ने कहा कि *जे नाची से बची * हम नाचते हैं अखरा में, अगर हम अखड़ा को बचाते हैं तो पर्यावरण को नष्ट होने से बचाते हैं। महालेख अखड़ा को। हमारा संगीत अजीबोगरीब है। रामदयाल मुंडा की तकनीक का सक्षम, दादाजी ने कहा कि *जे नाची से बची * हम नाचते हैं अखरा में, अगर हम अखड़ा को बचाते हैं तो पर्यावरण को नष्ट होने से बचाते हैं। महालेख अखड़ा को। हमारा संगीत अजीबोगरीब है।  

पद्मश्री मधु मंसूरी ने कहा था कि भाषाई उल् अजान कोई नया नहीं है। भाषा के विकास के लिए सबसे पहले प्रेग्नेंट हैं । प्रफुल्ल कुमार ऋषी ने भी आवाज उठाई है, इस शब्द का प्रयोग व्यक्ति भाषा के रूप में किया जाता है। आगे बढ़ने के लिए ऋण मिल जाएगा। गणगौर के बुजुर्ग साहित्यकार धनेंद्र प्रवाहण ने प्रफुल्ल सम्मान समारोह में दो कला-कारणों को सम्‍मिलित किया, जो मंगला के प्रतिभाशाली कोटाम, गुले के कौशल से सुसज्जित श्री रामउषित सिंह को लेखन और गायन प्रफुल्ल सम्मान से अभिमंत्रित किया गया। श्री रामूचित जी से संगीत बजने वाले गीत खतरनाक हैं। ये आकाशवाणी और दूरदर्शिता खतरनाक हैं। आज तक, संचार, इंटरनेट, इंटरनेट, बिहार आदि आदरं पूर्व में सम्मानित डॉक्टर शकुंतला मिश्री गमला की विशेषताएँ । गमगाँव में अपनी परीक्षा की जाँच करते हैं। स्थायी रूप से बदलते मौसम में, सदानी-नागपुरी शब्दकोश, सातो नदी परावर्तन के रूप में अच्छी तरह से बदलते हैं और अलग-अलग प्रकार के होते हैं। 14. संचार में प्रवेश किया हुआ साथ ही साथ दूरदर्शन केंद्र रांची द्वारा प्रेरणास्रोत सम्मान, झारखंड सरकार द्वारा कथा सम्मान, बिहार सरकार से विदुषी सम्मान आदि कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। ️ नदी️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️) 14. संचार में प्रवेश किया हुआ साथ ही साथ दूरदर्शन केंद्र रांची द्वारा प्रेरणास्रोत सम्मान, झारखंड सरकार द्वारा कथा सम्मान, बिहार सरकार से विदुषी सम्मान आदि कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। ️ नदी️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️) 14. संचार में प्रवेश किया हुआ साथ ही साथ दूरदर्शन केंद्र रांची द्वारा प्रेरणास्रोत सम्मान, झारखंड सरकार द्वारा कथा सम्मान, बिहार सरकार से विदुषी सम्मान आदि कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

    इस पर डॉ. हबीक अहमद, डॉ.महेश्वर सारंगी, डॉ.सविता केसरी, डी ग्लोबली दीपक शर्मा, हरिनंद पुरुष, मनपुरन नायक, डॉ. संजय सारंगी, डॉ. आरा आरा, डॉ. प्रभात रंजन तिवारी, डॉ. अंजुलता साहू, डॉ. जयकान्त, डॉ. कोरलेनौस मिंज, डॉ. कुमार कुमार, रवि ऑरिदार, राजमुनी, युगेश कुमार महतो, मनोज कच्छप, संतोष कुमार भगत, सुखराम उराँव, राम रवि कुमार, मीना कुमारी, सुमन कुमार, पप्पू कुमार मह, सोनू, रामदेव बड़ाईक, युव, श्रीकांत, श्यामा, सौरभ, नेहा, आशा देवी, किरण मिश्रा, उषा कुमारी, पुनी, प्रेम मंजरी, सलोनी आदि आदि।

धन्यवाद ज्ञापन सुखदेव साहू ने। सम्पादकीय भारत रत्न लता मंगेशकर, स्वर पद्मश्री डॉ. डॉक्टर डॉक्टरी गोंझू, डॉ. अंतिम संस्कार के बाद पूरा होने का पालन करें।

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