राँची विश्वविद्यालय का गोवा विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न

ब्यूरो रिपोर्ट/ झारखंड : भारत सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल *एक भारत श्रेष्ठ भारत (EBSB)* के अंतर्गत शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राँची विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने दिनांक 10 मार्च 2026 से 14 मार्च 2026 तक गोवा विश्वविद्यालय का सफलतापूर्वक दौरा किया।

उल्लेखनीय है कि इस आदान-प्रदान कार्यक्रम की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी, जब गोवा विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल डॉ. वाल्टर मेनेजीस के नेतृत्व में राँची विश्वविद्यालय आया था। उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए यह प्रत्युत्तर यात्रा आयोजित की गई।

इस प्रतिनिधिमंडल में राँची विश्वविद्यालय के पाँच संकाय सदस्य शामिल थे—
डॉ. स्मृति सिंह (संयोजक, EBSB एवं अध्यक्ष, विश्वविद्यालय रसायन विभाग),
डॉ. सुमित कुमार डे (सहायक प्राध्यापक, विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग),
डॉ. दीपाली ए. डुंगडुंग (सहायक प्राध्यापक, विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग),
डॉ. किशोर सुरीन (सहायक प्राध्यापक, विश्वविद्यालय मुंडारी विभाग) तथा
श्री विपुल नायक (प्रदर्शन एवं ललित कला विभाग)।

इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों के शोधार्थी—राशिका, अदिति, प्रीति एवं जगदीश तथा छात्र-छात्राएँ—अमित, अमुल्या, आकांक्षा, सुजय, नेहा एवं लक्ष्मी भी इस शैक्षणिक यात्रा में सम्मिलित थे।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 मार्च 2026 को प्रतिनिधिमंडल गोवा के लिए रवाना हुआ। गोवा विश्वविद्यालय पहुँचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया तथा उसी दिन सायं मीरामार समुद्री तट का भ्रमण कराया गया।

11 मार्च 2026 को EBSB कार्यक्रम के अंतर्गत गोवा दर्शन कराया गया, जिसमें सेंट ऑगस्टीन टावर, बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस, से कैथेड्रल चर्च, श्री दामोदर मंदिर, गोवा के राष्ट्रवाद के जनक टी.बी. कुन्हो के आवास तथा ऋषिवन (पारंपरिक कृषि स्थल) का भ्रमण शामिल था। प्रतिनिधिमंडल को गोवा का पारंपरिक भोजन भी कराया गया।

12 मार्च 2026 को गोवा विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य दोनों राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को साझा करना था। इस अवसर पर श्री विपुल नायक के निर्देशन में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर आधारित नृत्य, झारखंडी लोकनृत्य तथा भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष पर आधारित नाटक ‘उलगुलान’ प्रस्तुत किया। गोवा की ओर से कलशी नृत्य एवं फुगड़ी नृत्य जैसे पारंपरिक प्रस्तुतियाँ भी दी गईं।

कार्यक्रम के अंतर्गत गोवा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों का भ्रमण एवं छात्र-छात्राओं के बीच संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। *उसी दिन सायंकाल प्रतिनिधिमंडल ने गोवा के माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति श्री पूसापति अशोक गजपति राजू जी से लोक भवन में शिष्टाचार भेंट की। उनके सरल एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व ने सभी को प्रभावित किया।*

13 मार्च 2026 को भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. स्मृति सिंह मुख्य वक्ता रहीं। इस सम्मेलन में कुल 7 प्रतिनिधियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए तथा एक पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। देश के विभिन्न भागों से आए विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपने विचार साझा किए।

14 मार्च 2026 को कार्यक्रम के अंतिम दिन पारंपरिक व्यंजनों पर आधारित एक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्यों के सांस्कृतिक खाद्य स्वरूप का प्रदर्शन किया।

इस सफल शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के समापन पर गोवा के माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति एवं गोवा विश्वविद्यालय के कुलपति ने राँची विश्वविद्यालय और गोवा विश्वविद्यालय के मध्य औपचारिक *समझौता ज्ञापन (MoU)* स्थापित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों के बीच यह साझेदारी न केवल शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देगी, बल्कि *एक भारत श्रेष्ठ भारत* की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेगी।

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